जिंदगी का दूसरा नाम परिवर्तन है और हमे इसे स्वीकार करना ही पड़ता है । हम क्या सोचते है और क्या हो जाता है। पर फिर भी हमे आगे बढ़ना होता है । गुर वक़्त कही पीछे रह जाता है । हम आगे निकल जाते है । इसे ही तो परिवर्तन कहते है । और सच भी है परिवर्तन न हो तो क्या स्वरुप हो दुनिया का । रुका हुआ तो पानी भी सड जाता है। और ये इस बात की और इशारा है की रुकना हमारी नियती नहीं। change को स्वीकार करना और आगे बढ़ जाना यही एक जीवन का सच है। एक ऐसा जीवन जिससे सार्थक कह सके । और बस जिन्दगी के वक़्त के माहोल के इन्हें परिवर्तनों को मै आप सब से share करना चाहूगी।
Thanks
suneyana Sharma
No comments:
Post a Comment